2 Concept 2 : Vyanjan Sandhi (सदाशय & उद्घाटन)
- मूल सिद्धांत : दोनों उदाहरण व्यंजन संधि के अंतर्गत आते हैं। यह हिंदी व्याकरण के सबसे अधिक पूछे जाने वाले नियम “प्रथम वर्ण का तृतीय वर्ण में परिवर्तन” पर आधारित है।
➔ महा-नियम : यदि किसी शब्द का अंत प्रथम वर्ग का कठोर व्यंजन (क्, च्, ट्, त्, प्) हो और उसके बाद कोई स्वर, अथवा उसी वर्ग का तीसरा/चौथा व्यंजन, अथवा (य्, र्, ल्, व्) हो, तो वह प्रथम व्यंजन अपने ही वर्ग के तृतीय व्यंजन (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) में बदल जाता है।
● सदाशय (Sadashay)
विच्छेद : सत् + आशय
प्रक्रिया : पहला शब्द 'सत्' का अंत 'त्' से है। दूसरा शब्द 'आ' (स्वर) से शुरू है। नियम अनुसार 'त्' ➔ 'द्' (अपने वर्ग का तृतीय व्यंजन)। स्वर 'आ' से मिलकर 'दा' हो गया।
अतः : सत् + आशय = सदाशय।
● उद्घाटन (Udghatan)
विच्छेद : उत् + घाटन
प्रक्रिया : पहला शब्द 'उत्' का अंत 'त्' से है। दूसरा शब्द 'घ' (चौथा व्यंजन) से शुरू है। नियम अनुसार 'त्' ➔ 'द्' (अपने वर्ग का तृतीय व्यंजन)।
अतः : उत् + घाटन = उद्घाटन।
⚠
UPSC/Exam Trap : परीक्षक आपको शब्द 'दिग्गज' देकर उसका विच्छेद पूछेंगे। विकल्पों में 'दिग + गज' दिया होगा। 'ग' देखकर आप चुन सकते हैं। परंतु नियम के अनुसार 'ग' (तीसरा) मूलतः 'क' (पहला) से बदला है। सही उत्तर : दिक् + गज.