समास को समझने के लिए आपको इन 4 छोटे शब्दों को जानना होगा —
पहचान का नियम: इसका पहला पद मुख्य होता है और वह एक 'अव्यय' या उपसर्ग होता है (जैसे: अनु, आ, प्रति, भर, यथा, हर) होता है।
आसान ट्रिक: शब्द के शुरुआत में छोटे-छोटे उपसर्ग लगे होंगे, जिन्हें बदला नहीं जा सकता।
| समस्त पद | विग्रह | सुपर-इजी ट्रिक |
|---|---|---|
| प्रतिदिन | हर दिन | 'प्रति' उपसर्ग |
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार | 'यथा' उपसर्ग |
| आमरण | मरण तक | 'आ' उपसर्ग |
| भरपेट | पेट भरकर | 'भर' उपसर्ग |
पहचान का नियम: इसका दूसरा पद (उत्तरपद) मुख्य होता है।
आसान ट्रिक: जब आप इसका विग्रह करेंगे, तो बीच में कारक की विभक्तियाँ (को, से, के लिए, का, के, की, में, पर) निकलकर आएंगी।
| समस्त पद | विग्रह | गायब हुआ शब्द |
|---|---|---|
| राजपुत्र | राजा का पुत्र | 'का' गायब |
| गौशाला | गायों के लिए | 'के लिए' गायब |
| पापमुक्त | पाप से मुक्त | 'से' गायब |
| घड़सवार | घोड़े पर सवार | 'पर' गायब |
पहचान का नियम: इसका भी दूसरा पद मुख्य होता है, लेकिन पहला पद दूसरे पद की तारीफ (विशेषण) करता है या उसकी तुलना (उपमान) करता है।
आसान ट्रिक: शब्द को खोलकर देखने पर बीच में 'हैं जो' या 'के समान' आता है।
| समस्त पद | विग्रह | क्या हो रहा है? |
|---|---|---|
| नीलकमल | नीला है जो कमल | कमल की तारीफ |
| चन्द्रमुख | चन्द्र के समान मुख | मुख की तुलना |
| महात्मा | महान हैं जो आत्मा | आत्मा की तारीफ |
| चरणकमल | कमल के समान चरण | चरणों की तुलना |
पहचान का नियम: इसका पहला पद कोई संख्या (गिनती/Number) होता है और यह किसी समूह (Group) की बात करता है।
आसान ट्रिक: याद रखिए 'द्वि' का अर्थ ही 'दो' (गिनती) होता है! तो जहाँ गिनती दिखे, वहाँ द्विगु!
| समस्त पद | विग्रह | गिनती वाला शब्द |
|---|---|---|
| चौराहा | चार राहों का समूह | चार (4) |
| त्रिफला | तीन फलों का समूह | तीन (3) |
| सप्ताह | सात दिनों का समूह | सात (7) |
| पंचवटी | पाँच वटों का समूह | पाँच (5) |
पहचान का नियम: इसके दोनों पद प्रधान (बराबर) होते हैं। कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।
आसान ट्रिक: दोनों शब्दों के बीच में योजक चिह्न (–) लगा होता है और विग्रह करने पर बीच में 'और', 'या', 'तथा' आता है।
| समस्त पद | विग्रह | संबंध |
|---|---|---|
| माता-पिता | माता और पिता | बराबर का जोड़ा |
| दिन-रात | दिन और रात | एक-दूसरे के उलटे |
| सुख-दुख | सुख और दुख | एक-दूसरे के उलटे |
| दाल-रोटी | दाल और रोटी | खाने का जोड़ा |
पहचान का नियम: इसमें न पहला पद मुख्य होता है, न दूसरा पद। दोनों मिलकर किसी तीसरे अनजान/विशेष व्यक्ति या भगवान की तरफ़ ठंडी (इशारा) करते हैं।
आसान ट्रिक: 1 + 1 = 3 (दोनों शब्द मिलकर किसी तीसरे का नाम याद दिला देते हैं)।
| समस्त पद | सीधा अर्थ | तीसरा असली अर्थ |
|---|---|---|
| लंबोदर | लंबा है पेट (उदर) जिसका | गणेश जी |
| दशानन | दस सिर हैं (आनन) जिसके | रावण |
| चक्रपाणि | हाथ में चक्र है जिसके | विष्णु जी |
| पीतांबर | पीले हैं वस्त्र जिसके | कृष्ण / विष्णु जी |
परीक्षा हमेशा इन्हीं 2 जगहों पर छात्रो को फँसाता है —
• सवाल: 'दशानन' में पहला शब्द 'दस' (गिनती) है, तो यह द्विगु होना चाहिए या बहुब्रीही?
• समाधान: अगर शब्द किसी विशेष व्यक्ति (रावण) की ओर इशारा कर रहा है, तो हमेशा बहुब्रीही जीत जाएगा!
• पीतांबर:
- पीले हैं जो अंबर (कपड़े) = कर्मधारय (केवल कपड़े की तारीफ)।
- पीले हैं अंबर जिसके अर्थात् श्री कृष्ण = बहुब्रीही (विशेष भगवान की तरफ इशारा)।
• परीक्षा का नियम: यदि किसी प्रश्न में 'पीतांबर' या 'नीलकंठ' आए और विकल्पों में कर्मधारय और बहुब्रीही উভয় मौजूद हो, तो 'बहुब्रीही समास' चुनें!
| समास का नाम | मुख्य पद | सबसे आसान पहचान ट्रिक | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पहला पद | आगे उपसर्ग (प्रति, यथा, आ) या शब्द का दोहराव होगा। | प्रतिदिन, रातोंरात |
| तत्पुरुष | दूसरा पद | विग्रह करने पर बीच में कारक चिह्न (का, से, में) आएँगे। | राजपुत्र, पापमुक्त |
| कर्मधारय | दूसरा पद | विग्रह करने पर बीच में 'है जो' या 'के समान' आएगा। | नीलकमल, चन्द्रमुख |
| द्विगु | दूसरा पद | पहला शब्द गिनती/संख्या होगा। | चौराहा, त्रिफला |
| द्वंद्व | दोनों पद | बीच में योजक चिह्न (–) होगा और 'और/या' आएगा। | माता-पिता, सुख-दुख |
| बहुब्रीही | कोई पद नहीं (तीसरा पद) | दोनों शब्द मिलकर किसी भगवान या तीसरे अर्थ की ओर इशारा करेंगे। | लंबोदर, पीतांबर |