✨ समास ✨

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व्याकरण की भारी-भरकम परिभाषाओं को भूल जाइए। बस यह समझिये कि समास का मतलब होता है — "बड़े बात को छोटा बना देना" (संक्षीपतिकरण)।
1 समास क्या है ? (जादू का डिब्बा)
  • सोचिए, अगर आपको बार-बार बोलना पड़े —
    “ मैं रसोई बनाने के लिए घर में जा रहा हूँ।”
    तो कितना आलस आएगा? इसीलिए हिंदी भाषा ने एक जादू किया। उसने “रसोई बनाने के लिए घर” के बीच से ‘बनाने के लिए’ गायब कर दिया और एक प्यारा सा छोटा शब्द बना दिया : “रसोईघर”।
इसी बड़े शब्दों को मिलाकर छोटा नया शब्द बनाने के जादू को “समास” कहते हैं।
2 समास के 4 जरुरी सिपाही (शब्दावली)

समास को समझने के लिए आपको इन 4 छोटे शब्दों को जानना होगा —

  1. पूर्वपद (पहला शब्द): जो शब्द आगे खड़ा होता है। (जैसे : रसोई + घर में 'रसोई')
  2. उत्तरपद (दूसरा शब्द): जो शब्द पीछे खड़ा होता है। (जैसे : रसोई + घर में 'घर')
  3. समस्त पद (सामासिक पद): जो नया छोटा शब्द बनकर तैयार हुआ। (जैसे : रसोईघर)
  4. समास-विग्रह (जोड़ तोड़ना): उस छोटे शब्द को वापस खोलकर पूरा बड़ा लिख देना। (जैसे : रसोई के लिए घर)
समास के 6 भेद (समस्त कुल 6 मुख्य भेद होते हैं)
अव्ययीभाव
(पहला मुख्य)
तत्पुरुष
(दूसरा मुख्य)
कर्मधारय
(गुण / तुलना)
द्विगु
(गिनती / संख्या)
द्वंद्व
(दोनों बराबर)
बहुब्रीही
(तीसरा रहस्य)

भेद 1: अव्ययीभाव समास

पहचान का नियम: इसका पहला पद मुख्य होता है और वह एक 'अव्यय' या उपसर्ग होता है (जैसे: अनु, आ, प्रति, भर, यथा, हर) होता है।

आसान ट्रिक: शब्द के शुरुआत में छोटे-छोटे उपसर्ग लगे होंगे, जिन्हें बदला नहीं जा सकता।

समस्त पदविग्रहसुपर-इजी ट्रिक
प्रतिदिनहर दिन'प्रति' उपसर्ग
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार'यथा' उपसर्ग
आमरणमरण तक'आ' उपसर्ग
भरपेटपेट भरकर'भर' उपसर्ग
गुप्त जाल: जब एक ही शब्द दो बार लगातार आ जाए, तो वहाँ भी अव्ययीभाव समास ही होता है।
• रातेंरात = रात ही रात में
• हाथहोंथ = हाथ ही हाथ में
• दिनोंदिन = दिन ही दिन में

भेद 2: तत्पुरुष समास

पहचान का नियम: इसका दूसरा पद (उत्तरपद) मुख्य होता है।

आसान ट्रिक: जब आप इसका विग्रह करेंगे, तो बीच में कारक की विभक्तियाँ (को, से, के लिए, का, के, की, में, पर) निकलकर आएंगी।

समस्त पदविग्रहगायब हुआ शब्द
राजपुत्रराजा का पुत्र'का' गायब
गौशालागायों के लिए'के लिए' गायब
पापमुक्तपाप से मुक्त'से' गायब
घड़सवारघोड़े पर सवार'पर' गायब
नञ् तत्पुरुष समास: जिसके आगे 'अ' या 'अन' लगा हो और मतलब 'नहीं' निकले।
• अधर्म = न धर्म (जो धर्म न हो)
• अनपढ़ = न पढ़ा-लिखा

भेद 3: कर्मधारय समास

पहचान का नियम: इसका भी दूसरा पद मुख्य होता है, लेकिन पहला पद दूसरे पद की तारीफ (विशेषण) करता है या उसकी तुलना (उपमान) करता है।

आसान ट्रिक: शब्द को खोलकर देखने पर बीच में 'हैं जो' या 'के समान' आता है।

समस्त पदविग्रहक्या हो रहा है?
नीलकमलनीला है जो कमलकमल की तारीफ
चन्द्रमुखचन्द्र के समान मुखमुख की तुलना
महात्मामहान हैं जो आत्माआत्मा की तारीफ
चरणकमलकमल के समान चरणचरणों की तुलना

भेद 4: द्विगु समास

पहचान का नियम: इसका पहला पद कोई संख्या (गिनती/Number) होता है और यह किसी समूह (Group) की बात करता है।

आसान ट्रिक: याद रखिए 'द्वि' का अर्थ ही 'दो' (गिनती) होता है! तो जहाँ गिनती दिखे, वहाँ द्विगु!

समस्त पदविग्रहगिनती वाला शब्द
चौराहाचार राहों का समूहचार (4)
त्रिफलातीन फलों का समूहतीन (3)
सप्ताहसात दिनों का समूहसात (7)
पंचवटीपाँच वटों का समूहपाँच (5)

भेद 5: द्वंद्व समास

पहचान का नियम: इसके दोनों पद प्रधान (बराबर) होते हैं। कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।

आसान ट्रिक: दोनों शब्दों के बीच में योजक चिह्न (–) लगा होता है और विग्रह करने पर बीच में 'और', 'या', 'तथा' आता है।

समस्त पदविग्रहसंबंध
माता-पितामाता और पिताबराबर का जोड़ा
दिन-रातदिन और रातएक-दूसरे के उलटे
सुख-दुखसुख और दुखएक-दूसरे के उलटे
दाल-रोटीदाल और रोटीखाने का जोड़ा

भेद 6: बहुब्रीही समास

पहचान का नियम: इसमें न पहला पद मुख्य होता है, न दूसरा पद। दोनों मिलकर किसी तीसरे अनजान/विशेष व्यक्ति या भगवान की तरफ़ ठंडी (इशारा) करते हैं।

आसान ट्रिक: 1 + 1 = 3 (दोनों शब्द मिलकर किसी तीसरे का नाम याद दिला देते हैं)।

समस्त पदसीधा अर्थतीसरा असली अर्थ
लंबोदरलंबा है पेट (उदर) जिसकागणेश जी
दशाननदस सिर हैं (आनन) जिसकेरावण
चक्रपाणिहाथ में चक्र है जिसकेविष्णु जी
पीतांबरपीले हैं वस्त्र जिसकेकृष्ण / विष्णु जी
4 परीक्षा के सबसे बड़े भ्रम और ट्रिक्स (Expert Confusions)

परीक्षा हमेशा इन्हीं 2 जगहों पर छात्रो को फँसाता है —

भ्रम 1: द्विगु vs बहुब्रीही (जैसे: दशानन, त्रिनेत्र)

• सवाल: 'दशानन' में पहला शब्द 'दस' (गिनती) है, तो यह द्विगु होना चाहिए या बहुब्रीही?

• समाधान: अगर शब्द किसी विशेष व्यक्ति (रावण) की ओर इशारा कर रहा है, तो हमेशा बहुब्रीही जीत जाएगा!

  • दस आननों का समूह = द्विगु समास।
  • दस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण = बहुब्रीही समास (सही और प्राथमिक उत्तर)।

भ्रम 2: कर्मधारय vs बहुब्रीही (जैसे: पीतांबर, नीलकंठ)

• पीतांबर:
- पीले हैं जो अंबर (कपड़े) = कर्मधारय (केवल कपड़े की तारीफ)।
- पीले हैं अंबर जिसके अर्थात् श्री कृष्ण = बहुब्रीही (विशेष भगवान की तरफ इशारा)।

• परीक्षा का नियम: यदि किसी प्रश्न में 'पीतांबर' या 'नीलकंठ' आए और विकल्पों में कर्मधारय और बहुब्रीही উভয় मौजूद हो, तो 'बहुब्रीही समास' चुनें!

5 त्वरित पहचान सारणी (Quick Revision Matrix)
समास का नाम मुख्य पद सबसे आसान पहचान ट्रिक उदाहरण
अव्ययीभाव पहला पद आगे उपसर्ग (प्रति, यथा, आ) या शब्द का दोहराव होगा। प्रतिदिन, रातोंरात
तत्पुरुष दूसरा पद विग्रह करने पर बीच में कारक चिह्न (का, से, में) आएँगे। राजपुत्र, पापमुक्त
कर्मधारय दूसरा पद विग्रह करने पर बीच में 'है जो' या 'के समान' आएगा। नीलकमल, चन्द्रमुख
द्विगु दूसरा पद पहला शब्द गिनती/संख्या होगा। चौराहा, त्रिफला
द्वंद्व दोनों पद बीच में योजक चिह्न (–) होगा और 'और/या' आएगा। माता-पिता, सुख-दुख
बहुब्रीही कोई पद नहीं (तीसरा पद) दोनों शब्द मिलकर किसी भगवान या तीसरे अर्थ की ओर इशारा करेंगे। लंबोदर, पीतांबर